मुझे ऐसा मिला मोती

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे ऐसा मिला मोती ऐसा मोती कोई सागर में न होगा,

मुझे ऐसा मिला तारा ऐसा तारा कोई अम्बर में न होगा,

तन जिसका है मन भावन मन जिसका पावन पावन,

ऐसे वो मिला जैसे की मिले प्यासी धरती को सावन,

मुझे ऐसा मिला मोती ऐसा मोती कोई सागर में न होगा,

महलो से मैं कब मानी दौलत को दौलत न जानी,

सारा ही जहां सूरज देखे मैं सीरत की दीवानी,

मुझे ऐसा मिला मोती ऐसा मोती कोई सागर में न होगा,

वो वफ़ा करे सेह लुंगी वो गिला करे गिला करे सेह लुंगी,

जिस हाल वो रखे मुझको उस हाल में मैं रह लुंगी,

मुझे ऐसा मिला मोती ऐसा मोती कोई सागर में न होगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।