आवाज़ की दुनिये से चले दूर कही दूर चले

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॥ पावन पाठ ॥

आवाज़ की दुनिये से चले दूर कही दूर चले,

चाँद सितारों से दूर बड़े दूर चले,

आवाज़ की दुनिये से चले दूर कही दूर चले,

याहा देह का दुनिया का कोई बाण नहीं है,

कोई गम नहीं हलचल नहीं तूफ़ान नहीं है,

बड़ी शान से खुशियों से घर भरपुर हो निकले,

आवाज़ की दुनिये से चले दूर कही दूर चले,

वहा ना कोई समय की सीमा रिश्तो का ना कोई बंधन,

बड़ी सलोनी थी मधुर शांति है ये समजे जाने हमारा ही मन,

सभी शक्तियां अंदरिये सुख खजाने हमे मिले.

आवाज़ की दुनिये से चले दूर कही दूर चले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।