हम जो सहारा ढूंढ ते थे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हम जो सहारा ढूंढ ते थे वो सहारा मिल गया,

हम को हमारी खुशियों का संसार सारा मिल गया,

जग में हमारे वास्ते बंद थे सारे रास्ते,

हम को हमारी बंधन से अब छुटकारा मिल गया,

हम जो सहारा ढूंढ ते थे वो सहारा मिल गया,

भवरो के बीच नैया थी नाइयाँ बिन खवइयाँ थी,

गबरा के हमने पुकारा तो तारणहारा मिल गया,

हम जो सहारा ढूंढ ते थे वो सहारा मिल गया,

फिरते थे हम यहाँ वाहा ऊजलां में थे की जाये कहा,

इसका समाधान हम को यहाँ बाबा के द्वारा मिल गया,

हम जो सहारा ढूंढ ते थे वो सहारा मिल गया,

माया से अब हम दूर हुए आनंद से भरपूर हुए,

हमने जो चैन खोया था वो दुबारा मिल गया,

हम जो सहारा ढूंढ ते थे वो सहारा मिल गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।