मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है - 2

सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है -2

मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है - 2

सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है -2

मैने जीवन बिताना है -2 सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है -2

1 . सतगुरु की बगिया का बन कर मैं फूल रहूँ -2 बन कर मैं फूल रहूँ -2

दाता के चरणों की बन कर मैं धुल रहूँ -2 बन कर मैं धुल रहूँ -2

चरणों की धूलि को मस्तक पे लगाना है - २ मस्तक पे लगाना है इसे अपना बनाना है

मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है, मेरे दाता का दर ही मेरा असली ठिकाना है - 2

2 मेरे सतगुरु ने हमको जीना सिखलाया है -2

श्री आरती पूजा और सत्मार्ग दिखाया है - 2

दरबार से हमको मिला ये असली खजाना है,

ये असली खजाना है भक्ति का खजाना है -2

सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है -2

3 दिल की हर धड़कन मैं तेरा ही नाम रहे - 2

मुझको दिन रात प्रभु बस तेरा ध्यान रहे -2

इन आँखों ने केवल तेरा दर्शन पाना है

तेरा दर्शन पाना है, तेरा धयान लगाना है

इन आँखों ने केवल तेरा दर्शन पाना है -2

सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है -2

4 मैं तेरी रहूँ दाता तुम मेरे कहलाओ -2

इस द्वारे पे खड़ी रहूँ तुम सदा नजर आओ - 2

इस दासी ने तुझको ही बस आपना बनाया है

बस आपना बनाया है - २ आँखों में तेरा ही बस तेरा रूप बसाया है

मैने रूप बसाया है - २, चरणों की धूलि को मस्तक पे लगाना है - 2

दरबार से हमको मिला ये भक्ति का खजाना है - 2

भक्ति का खजाना है, कहीं और न जाना है -2

दाता तेरे चरणों में मैने जीवन बिताना है -2

मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है - 2

इस दासी ने तुझको ही बस आपना बनाया है -2

आँखों में तेरा ही बस ही तेरा रूप बसाया है - 2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।