ज़िंदगी एक अज़ब मोड़ पे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ज़िंदगी एक अज़ब मोड़ पे आ खड़ी थी,

और तुम आये और तुम आये,

हर ख़ुशी साथ मेरा छोड़ कर जा रही थी,

और तुम आये और तुम आये,

मैं हर कदम दिलबर साथ चलू,

थाम के हाथो में हाथ चलु,

सारी उम्र दामन छोड़ू न,

डोर उमीदो की तोडू न,

याद आके तेरी मुझको तड़पा रही थी,

और तुम आये और तुम आये,

हर ख़ुशी साथ मेरा छोड़ कर जा रही थी,

और तुम आये और तुम आये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।