मेरे बांके बिहारी सांवरियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे बांके बिहारी सांवरियां क्यों ये परदे लगाए हुए है,

तेरे नैनो से नैना मिलाने हम भी दर तेरे आये हुए है,

तेरी छुपने की आद्दत पुराणी मैं भी दासी हु तेरी दीवानी,

इश्क़ की चोट खाई है तुमसे,

अपना दिल भी लुटाये हुए है,

मेरे बांके बिहारी सांवरियां क्यों ये परदे लगाए हुए है,

तेरे लाखो हज़ारो दीवाने मेरी गिनती किसी में नहीं है,

फिर भी आये है तुमको रिझाने,

नीर आँखों में लाये हुए है,

मेरे बांके बिहारी सांवरियां क्यों ये परदे लगाए हुए है,

जब वो आई करोली की रानी तब थे न क्यों ये परदे लगाए,

खोल कर कान सुन लो जी तुम तो घर ले जाने के लिए आये हुए है,

मेरे बांके बिहारी सांवरियां क्यों ये परदे लगाए हुए है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।