जैसा हूँ तेरा हूँ साईं

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॥ पावन पाठ ॥

हाथो में फल फूल नहीं, आँखों में आंसू लाया हूँ

जैसा हूँ तेरा हूँ साईं, श्री चरणों में आया हूँ

तेरे दर पे आकर साईं खुद पर भरोसा आया है

अनहोनी सी बात हुई है, जेसे सब कुछ पाया है,

भटक भटक कर हार गया हूँ, कदम कदम ठुकराया हूँ,

जैसा हूँ तेरा हूँ साईं श्री चरणों में आया हूँ

तेरी दुनिया से जो है पाया, वोही तुज को अर्पण है,

मन मैला या धुन्दला है, अब तो यह तेरा दर्पण है

तेरी ही माया है साईं इ इ, जिस से मैं फ़रमाया हूँ

जेसा हूँ तेरा हूँ साईं, श्री चरणों में आया हूँ

हाथो मई फल फूल नहीं इ इ इ इ......जय साईं राम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।