प्यार की राह में

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॥ पावन पाठ ॥

प्यार की राह में चलना सीख,

इश्क़ की आग में जलना सीख

मैं तुझसे दिल की बात कह तो दूँ,

तू भी पर दिल की बात करना सीख

प्यार की राह में चलना सीख,

इश्क़ की आग में जलना सीख

फ़ासले हम में तुम में मेरे यार सदियों से हैं

फसलों को मेरे यार तू कम करना तो सीख

प्यार की राह में चलना सीख,

इश्क़ की आग में जलना सीख

मेने हर पल करे है मेरे यार परवाह तेरी॥

मेरी इस परवाह की परवाह करना सीख

प्यार की राह में चलना सीख

इश्क़ की आग में जलना सीख...॥

श्रवण भार्गव

गुना (म. प्र.)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।