नच नच नच मेरी मोरनी तू नच

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छम छम नाचे तेरी मोरनी मोहन,

तुझे मोर पंख भाये सदा काला रसियां,

इस लिए मैंने मोरनी का रूप ले लियाँ,

नच नच नच मेरी मोरनी तू नच,

मीठी मुरली बजाये तेरा श्याम रसिया,

तेरे रूप ने तो मेरा तन मन मोह लिया,

मोरनी के रंग ढंग काहे तुम्हे भाये है,

इसी लिए पंख तूने माथे पे सजाये है,

लेके मन में उमंग आई कान्हा तेरे संग,

तेरे बिना मेरे कान्हा लागे ना जिया,

मेरे मन में समया तू ही ब्रिज रशियन,

इसीलिए मैंने मोरनी का रूप ले लिया,

मोरनी दीवानी मेरी मेरे गुण गाये है

पंखो का मुकट मेरे माथे पे सजाये है,

मेरी मोरनी दीवानी सच्ची प्रेम कहानी इसके रूप ने बैरागी मेरा मन मोह लिया,

इसका दीवाना हुआ है अब कान्हा रसियां,

तेरे रूप ने तो हाय मेरा रूप मोह लिया,

बड़ी भाग्यशाली भाग्ये वां हु मोरनी,

श्याम जी की सेवा मैंने पाए मन वनवारी,

मुझे भाये श्याम रंग मेरा गोरा गोरा अंग,

मुझे रंगो अपने ही रंग श्याम पिया तेरे रूप ने तो मेरा हाय मन मोह लिया,

इसीलिए मैंने मोरनी का रूप ले लिया,

नच नच नच मेरी मोरनी तू नच,

मीठी मुरली बजाये तेरा श्याम रसिया,

तेरे रूप ने तो मेरा तन मन मोह लिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।