कंठ में आन बसों मैया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

कंठ में आन वसो मैया मैं सुमरो तेरो नाम,

केसों में कंकाली माता,

माथे मनसा देवी माता जी,

आँखों में अंजनी सुमाता,

गव्हो हाथ मैयां मैं सुमिरो तेरो नाम,

कंठ में आन वसो मैया मैं सुमरो तेरो नाम,

वो है भवानी भोली भाली,

कान विराजो कालका रानी जी,

पलकों पारवती पर्ण वाली,

हरो पीड मइया मैं सुमिरो तेरो नाम,

कंठ में आन वसो मैया मैं सुमरो तेरो नाम,

नाक वसुनर मृगा भवानी,

गालो में गंगा महारनी जी,

जिभ्या में यमुना कल्याणी,

करो पार नईया मैं सुमिरो तेरो नाम,

कंठ में आन वसो मैया मैं सुमरो तेरो नाम,

दंत बसों दुर्गा दुःख हारी,

गर बीच गोरा गुणकारी जी,

भुजा भेरवी भव भय हारी चाहू दर्श मैया मैं सुमिरो तेरो नाम,

कंठ में आन वसो मैया मैं सुमरो तेरो नाम,

सुर में वसो शारदा सुहानी,

हिर्दये हिंग लाज हर शानी जी,

सांसो में सरसुती समानी,

सुनो टेर मइयां मैं सुमरो तेरो नाम,

कंठ में आन वसो मैया मैं सुमरो तेरो नाम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।