भोले का मेला आ गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले का मेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

सावन का वेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

सब छोड़ के कारो बार देखो पौंछ गए हरिद्वार

बाबा की कावड़ लेने,मस्ती का आलम छा गया नाच रहे कावड़ियाँ,

भोले का मेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

कंधे पे कावड़ उठाये और सर पिट दौड़ लगाये,

पाओ में घुँगुरु बांधे सब झूमे नाचे गाये,

भोले का नशा छा गया नाच रहे कावड़ियाँ,

भोले का मेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

ये है भोले के मतवाले क्या देखे पाँव के छाले,

जब कावड़ इनकी डोले जय बम बम बोले बोले,

भोले की धुन में खो गया नाच रहे कावड़ियाँ,

भोले का मेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

भोले के दर्शन करके तेरा रोम रोम हर्षाये,

तेरा अद्भुत देख नजारा ब्रिज शर्मा महिमा गाये,

सब आनदं आनदं हो गया नाच रहे कावड़ियाँ,

भोले का मेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

दास कावड़ जो लाये और बाबा के गुण गाये,

जो कावड़ घडी ले आये वो भोले के हो जाये,

भगतो का दी जे वर्मन का दी जे छा गया नाच रहे कावड़ियाँ,

भोले का मेला आ गया नाच रहे कावड़ियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।