क्या करू क्या करू मैं क्या करू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कभी देखा नहीं किसी का नसीबा,

जैसा लेखा विधाता ने मेरा,

क्या करू क्या करू मैं क्या करू,

बाल सखा कुछ ऐसे थे ना गइया न पैसे थे,

मन चंचल था बचपन का जिद माखन का कर बैठा,

धर्म यारी का मैंने निभाया हो चोर दुनिया ने मुझको बताया,

क्या करू क्या करू मैं क्या करू,

वे खुला रोज नहाती थी शर्म जरा नहीं आती थी,

उनको सबक सीखना था कपड़े मुझे छिपाना था,

कैसा दुनिया ने मुझको सताया देखो छलियाँ मुझको बताया,

क्या करू क्या करू मैं क्या करू,

कौरव भी मुझे प्यारे थे पांडव बड़े दुलारे थे,

लेकिन इक मजबूरी थी धर्म अधर्म की दुरी थी,

महाभारत को रोक नहीं पाया दोष सारा मेरे सिर पे आया,

कुल नाशक ये मोहन कहलाया

क्या करू क्या करू मैं क्या करू,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।