गले में नागो की माला जट्टो में गंगा जी की धारा महादेवा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गले में नागो की माला जट्टो में गंगा जी की धारा महादेवा

भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा,

दिल करता है जल मैं चडाऊ, जल लेने को नदियों में जाऊ

नदिया देने को तेयार मछली करती है इनकार महादेवा

भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा,

दिल करता है दूध मैं चडाऊ, दूध लेने को गॊशाला जाऊ

गैया देने को तेयार बछड़ा करता है इनकार महादेवा

भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा,

दिल करता है फूल मैं चडाऊ, फूल लेने को बागो में जाऊ

फूल आने को तेयार भंवरा करता है इनकार महादेवा

भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा,

दिल करता है फल मैं चडाऊ, फल लेने को बागो में जाऊ

फल आने को तेयार तोता करता है इनकार महादेवा

भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।