भोलेनाथ भंगाडी तेरी भंग

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अरे तूने पिलाई मैंने पी ली,

अरे कैसा जादू कर गई

हो भंग चढ़ गई lll भोलेनाथ,

भंगाडी तेरी भंग चढ़ गई I

भंग चढ़ गई भोलेनाथ,

भंगाडी तेरी भंग चढ़ गई ll

अरे यह गौरां, अमृत का जल है,

''मैंने तुझसे, किया नहीं छल है ll''

हो,, छल बल की मैं, बात ना करती,

"चढ़ गई भांग, इसीलिए डरती ll"

हो,, दिखे दिन भी, मुझ को रात,

यह कैसा, जादू कर गई,,,,, l

हो भंग चढ़ गई ll भोलेनाथ,,,,,,,,,,

हे गौरां, भांग मेरी का, खेल निराला,

"पिए इसको, कोई मतवाला ll"

हे भोले, भांग तेरी में, अक्क धतूरा,

"मुझ पे जादू, कर गया पूरा ll"

हे भोले, तेरी ये सौगात,

रे मुझ पे, भारी पड़ गई,,,,, l

हो भंग चढ़ गई ll भोलेनाथ,,,,,,,,,,

हे गौरां, भांग मेरी यह, सभ को भाए,

"ऐसा क्या जो, तुझे सताए ll"

हे भोले, जब से पी है, सर चकराए,

"सभी देख, मेरी हंसी उड़ाए ll"

रे भोले, भांग तेरी को देख,

ये दुनियां, पीछे पड़ गई,,,,,,l

हो भंग चढ़ गई ll भोलेनाथ,,,,,,,,,,

अपलोड करता- अनिल भोपाल बाघीओ वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।