मैं हूँ छोरी हरयाणे की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं हूँ छोरी हरयाणे की कैसे क्या करवा दू गी,

जे खाटू न ले चले तो नो नो ताल नचा दूंगी,

मैं हूँ छोरी हरयाणे की....

जे ससुरो खाटू ले चले धोती दौड़ सूखा दूंगी,

जे खाटू न ले जा धोती फाड़ रुमाल बना दूंगी,

मैं हूँ छोरी हरयाणे की......

ये सासु खाटू ले चाले धी का पलका डालू गी,

ये खाटू न ले चाले तो रोटा ने तरसा दूंगी,

मैं हूँ छोरी हरयाणे की.....

जे देवर खाटू ले चाले द्योरानी पटा दूंगी,

ये खाटू न ले चाले तो तीन तलाक करवा दूंगी,

मैं हूँ छोरी हरयाणे की......

जे ननद खाटू ले चाले नन्दोई मनवा दूंगी,

जे खाटू न ले चले तो पीहर बंद करवा दूंगी,

मैं हूँ छोरी हरयाणे की

जे परिवजी खाटू ले चाले संग में ले जिमादूंगी,

जे खाटू न ले चले तो धका दे के गिरा दूंगी,

मैं हूँ छोरी हरयाणे की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।