नी मैं सोवां ते जगांदियाँ ने तेरियां यादां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नी मैं सोवां ते जगांदियाँ ने तेरियां यादां ॥

नि मैं जगा ते सतान्दियाँ ने तेरियां यादां,

साडा दिल सारी रात तेरे मंदिरा च रहंदा,

तेरी मूर्ति नु तकदा मुहो कुज भी न कहंदा,

जिथे जावा मैं औंदियाँ ने तेरियां यादा,

नी मैं सोवां ते जगांदियाँ ....

तेरे द्वारे ते आके जिहने झोली है फेलाई,

ओहदी आस किती पूरी जरा ना देर वी लाइ,

नि अम्बे रानिये ने हसौन्दिये ने तेरियां यादा,

नी मैं सोवां ते जगांदियाँ

तेरी याद ना आये एसा कोई पल ना आये,

मेरी हर सास दाती भेटा तेरियां ही गाये,

नाल चंचल ते गांदियाँ ने तेरियां यादा,

नी मैं सोवां ते जगांदियाँ......

तेरे दर्शन दी आस लेके आये दर तेरे,

तेरे चरना च दाती आसी ला ने फेरे,

कदे तेनु भी आन्दियाँ ने मेरियां यादा,

नी मैं सोवां ते जगांदियाँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।