माँ मैं लोका जाया सयाना नई

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा गुरु वाणी दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

तेथो मंगना मेनू आना नही,

सब सयाने लोका नु तू कोठी बंगले कार दे,

मेनू कमले नु माइये झिड़का ही दो मार दे,

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

वैसे ता तू माये सब दा ख्याल पूरा करदी है,

खाली कोई नि जन्दा तू सबदे खजाने भर दी है,

फिर भी जो मंग दा ओहनू दोलते भंगार दे,

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

रोंदे रोंदे आये जेहरे हसदे जान सवाली माँ,

सब नु देदे पुत्र थियां भर दे झोली खाली माँ,

गल बना दे बिगड़ी सब दी सब दे कम सवार दे,

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

कर माँ किरपा राजी वसन सारे बच्चे माँ वा दे,

भूले भी न छुटन माये रिश्ते भेन परावा दे,

दुःख सुख हों सब दे सांजे जोड़ दिला दी तारदे,

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

झिड़का तेह्तो खा के माये जग दियां झिड़का तो बच जावा,

दुनिया दारी दे विच माये मार कदी भी न खावा,

कमला तेरा रहे कमला एसे नेक विचार दे,

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

वैसे ता एह मन बंदे दा कदे भी माये रज दा नि,

अपने लई भी बोहता मंगा सागर नु माँ सजदा नि,

मेरा की है मेनू चा सीसा देके सार दे,

माँ मैं लोका जाया सयाना नई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।