जगराते वालिये तेरी जय जयकार

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं बलहार तेरियां जोता तो/दरबार तो/तेरे मंदिरा तो/जगराते तो,

जगराते वालिये तेरी जय जयकार,

नवराते वालिये तेरी जय जयकार,

तेरी लीला कोई न जाने तेरी महिमा अपरम्पार,

जगराते वालिये तेरी जय जयकार...

तेरी जोत जगा कर बेठे तेरा जगन रचाए,

भक्त गुनी जन मिल कर सारे तेरी भेंटे गाये,

किरपा करदे हे जगदम्बे विनती तुझसे बारम बार,

जगराते वालिये तेरी जय जयकार,

दूर दूर से आई दर पे माँ भक्तो की टोली,

तुम्हे मनाये तुमे रिजाये हे जगदम्बे भोली,

बेठे है झोली फेलाके भर दे माँ सब के भण्डार,

जगराते वालिये तेरी जय जयकार,

हम सब तेरे बचे दाती तू है सब की माता ,

सबके बिगड़े काम सवारे जग की भाग भिदाता,

चंचल को भी तारो मियाँ तू है जग की खेवन हार,

जगराते वालिये तेरी जय जयकार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।