सारी उम्र तुम्हारी कमी

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॥ पावन पाठ ॥

सारी उम्र तुम्हारी कमी खले गी माँ,

जब दूंगा आवाज तू संग चले गी माँ,

मेरी माँ मेरी माँ तेरे जैसा दूजा और कहा,

ममता की छाओ में माँ तूने मुझको पाला,

मेरे जीवन मे किया माँ खुशियों का उजाला,

तुझ में ही तो है रब माँ तू दूर मुझसे कब माँ,.

मेरी माँ मेरी माँ तेरे जैसा दूजा और कहा,

सब दोबारा पा लूंगा माँ तुम को कैसे पाउ गा,

कभी यादो में कभी सपनो में तुम को ही भुलाऊगा,

वो पल फिर से आये माँ जो दिन तेरे संग बिताये माँ,

मेरी माँ मेरी माँ तेरे जैसा दूजा और कहा,

मेरी गलती भुला देती थी ऐसी थी तू माँ,

सच्ची थी बिलकुल सीधी थी अच्छी थी तू माँ,

मेरे सिर पे तेरा हाथ माँ याद आये तेरी हर बात माँ,

मेरी माँ मेरी माँ तेरे जैसा दूजा और कहा,

देके मुझको लोरियां तूने ही सुलाया था,

जब भी मैं रोया था मा तूने ही हास्या था,

जायज की तू है जान माँ कैसे भूलू तेरे एहसान माँ,

मेरी माँ मेरी माँ तेरे जैसा दूजा और कहा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।