हांरे मारा मनड़ा बदल गया दिनड़ा ,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हांरे मारा मनड़ा बदल गया दिनड़ा,

वा पैलां री बात नहीं,

गौ माता की हाल बिगड़ गई, जीवती री खाल उदड़ गयी,

सावन सुखों सुखों जावे , बे मौसम बरसात गणी,

हांरे मारा मनड़ा ......

ईपीतल जुगड़ी पर छाई , मां जाया बोले नहीं भाई,

बेटो बाप ने आंख दिखावे , श्रवण सी सन्तान नहीं,

हांरे मारा मनड़ा ......

सतवंती नहीं रही लुगायां , बात करें घूँघट ने उठाया,

बहू सास ने गाल्या काढ़े , वा घूँघट में बात नही,

हांरे मारा मनड़ा ......

कई कई साधु हुया स्वादु , माया जाल को लाग्यो जादू,

बाबा जी ने चेला प्यारा , चेला में वा बात नही,

हांरे मारा मनड़ा ......

धुला राम जी कह गया सांची , ई कल युग री पोथी वांची,

सिर पर हाथ है गुरुदेव रो , दुश्मन की औकात नही,

हांरे मारा मनड़ा ......

प्रजापति म्यूजिकल ग्रुप भीलवाड़ा - 8947915979

भजन गायक - चम्पा लाल प्रजापति , मालासेरी डूँगरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।