जो रंग बरस रह्यो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जो रस बरस रहा बरसाने, सो रस तीन लोक में नाँय

तीन लोक में नाँय, सो रस बैकुंठहु में नाँय ॥

जो रस ....

सँकरी गली बनी पर्वत में,

दधि बेचति राधिका डगर में,

श्याम की गाय चर रहीं बन में,

दीने सखा सिखाय ॥

जो रस ....

दे जा दान कुँवरि मोहन को,

तब छोड़ेंगे दधि-माखन को,

राज है यहाँ मनमोहन को,

दान लेंयगे धाय ॥

जो रस ....

राधा संग सखी मदमाती,

कान्हा संग सखा उतपाती,

घेर लईं ग्वालन सरमाती,

मन में अति हरषाँय ॥

जो रस ....

सुर-नर-मुनि सब की मति बौरी,

भज के चले बिरज की ओरी,

देखि-देखि या ब्रज की छोरी,

ब्रह्मादिक ललचाँय ॥

जो रस ....

संदीप स्वामी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।