साई का नाम अनमोल

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तू साई साई बोल रे नाम अनमोल रे,

ये ज़िंदगी सवार ले लगे न कुछ मोल रे,

तू साई साई बोल रे....

समय का पंक्षी तेरे हाथो से उड़ जाये गा,

साई का नाम तू रट ले जीवन तर जायेगा,

तू फिर पश्ताये गा समज नहीं पाए गा,

अभी से तू सवार ले,ये जीवन अनमोल रे,

तू साई साई बोल रे....

तू प्यारा बन साई का नजारा फिर देख ले,

साई के श्री चरणों में ये जीवन सौंप दे,

भटक न छोड़ दे साई का नाम ले,

धुनि ये साई नाम की जो देती आँख खोल रे,

तू साई साई बोल रे

ये शिरडी के मालिक है इन्हे तू पहचान ले,

ना बन नादान तू प्यारे साई को मान ले,

ये रेहमत के भंडार ये जग के तारण हार,

रही साई नाम की तू भी तो जय जय बोल रे,

तू साई साई बोल रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।