मेरे सतगुरु दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे - 2

चाहे कोई एतबार न करे - 2

मेरे सतगुरु दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे - 2

1 श्यमा असां विच कमिय बथेरियां, चाहे चंगी हाँ मंदी हाँ मैं तेरी हाँ -2

जिथे किरपा उथे होवन सहाई, चाहे कोई एतबार न करे -2

मेरे सतगुरु दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे -2

2 एतां राम कृष्ण मुरार जी, कलयुग विच लिया अवतार जी - 2

एतां दुखियां दे इक राम राही, चाहे कोई एतबार न करे -2

मेरे सोहने दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे - 2

3 प्रेमा भक्ति दा रास्ता दिखान्व्दे, करके किरपा कोल बुलान्वादे - 2

बेकदरां ने कदर न पाई, चाहे कोई एतबार न करे - 2

मेरे दाते दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे - 2

4 लोकी कहंदे ने दिलं दे कठोर जी, दासी कहन्दी है ऐदे जया न होर जी - 2

जेह्दा एड्डी नजर तो गिर जावे, ओहनू ते कोई प्यार न करे - 2

मेरे सतगुरु दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे - 2

चाहे कोई एतबार न करे - २

मेरे सतगुरु दा रूप इलाही चाहे कोई एतबार न करे - 2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।