तेरे फूलों से भी प्यार तेरे कांटो

श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार,

तू जो भी देना चाहे देदे मेरे करतार,

तेरी मर्ज़ी में विधाता कोई छुपा बड़ा राज़,

दुनिया चाहे हमसे रूठे तू ना होना नाराज़,

तुझे वंदन है बार बार हमको करले तू स्वीकार,

तू जो भी देना चाहे देदे मेरे करतार,

तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार,

हमको दोनो है पसंद, तेरी धूप और छाँव,

दाता किसी भी दिशा में ले चल ज़िंदगी की नाव,

चाहे हमे लगादे पार या डुबो दे मझदार,

तू जो भी देना चाहे देदे मेरे करतार,

तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार,

चाहे सुख दे या दुख, चाहे खुशी दे या गम,

मालिक जैसे भी रखेगा वैसे रह लेंगे हम,

चाहे खुशी भरा संसार या दे आँसुओं की धार,

तू जो भी देना चाहे देदे मेरे करतार,

तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार,

Sandeep Swami

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।