सोने का त्रिशूल कमंडल पित्तल दा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सोने का त्रिशूल कमंडल पित्तल दा

कैसा सोहना रूप है भोले शंकर का

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरी जटो में गंगा साजे

तेरी जटो में गंगा साजे वो बड़ी प्यारी लागे

कमंडल पित्तल दा,

कैसा सोहना रूप है भोले शंकर का

सोने का त्रिशूल कमंडल पित्तल दा

कैसा सोहना रूप है भोले शंकर का

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरे माथे पे चंदा साजे

तेरे माथे पे चंदा साजे, वो बड़ा प्यारा लागे

कमंडल पित्तल दा

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरे गले में नाग विराजे

तेरे गले में नाग विराजे वो बड़े प्यारे लागे

कमंडल पित्तल दा

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरे कानों में कुंडल साजे

तेरे कानों में कुंडल साजे वो बड़े प्यारे लागे

कमंडल पित्तल दा

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरे तन पे मृगशाला साजे

तेरे तन पे मृगशाला साजे वो बड़ी प्यारी लागे

कमंडल पित्तल दा

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरे संग में गौरा साजे

तेरे संग में गौरा साजे, वो बड़ी प्यारी लागे

कमंडल पित्तल दा

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरी गोदी मैं गणपति साजे

तेरी गोदी मैं गणपति साजे, वो बड़े प्यारे लागे

कमंडल पित्तल दा

मैं जब जब तुमको देखूं, तेरे चरणों मैं नंदी साजे

तेरे चरणों मैं नंदी साजे वो बड़ा प्यारे लागे

कमंडल पित्तल दा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।