एक भाई के जैसा ही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक भाई के जैसा ही तुझे पाया है सँवारे,

ये प्रेम नहीं टूटे कभी प्रीत नहीं टूटे,

बांध करती हु आँखों को भाई बन के तू मुस्काये,

ये रिश्ता नहीं छूटे कभी रिश्ता नहीं छूटे,

तू संग है मेरे सँवारे ना कोई कमी है,

तेरी किरपा ही रहे अँखियो में नमी है,

इक तेरे भरोसे पे दुःख भूली मैं जीवन का,

तू मुझसे नहीं रूठे कभी रिश्ता नहीं छूटे,

एक भाई के जैसा ही

तेरे कलहाइ पे प्रभु मैंने बाँधी डोर है,

कहने को है भाई बड़े तुम सा न और है,

मेरी रक्षा तेरे हाथो लाज मेरी तू ही रखता,

ये प्रेम नहीं टूटे कभी प्रीत नहीं टूटे,

एक भाई के जैसा ही

भाई बहना के प्रेम का कोई होता न मोल है

होती कोई न मिसाल ना कोई ना होती खोल है,

कहे चोखानी ओ कान्हा इस पावन बंधन की,

प्रेम गगरी न फूटे कभी रिश्ता नहीं छूटे,

एक भाई के जैसा ही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।