तू हो कर देख फ़कीर का

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॥ पावन पाठ ॥

दर दर पे भटकना छोड़ दे तू,

इक दर से ही रिश्ता जोड़ ले तू,

बदले गा खेल तकदीर गा,

तू हो कर देख फ़कीर का

श्रद्धा सबुरी का पालन कर तू साई की चौकठ आया कर,

जैसे राखे मर्जी उसकी सुख दुःख हास्के अपनाया कर,

हर मुश्किल तेरी हरे गा वो,

खुशियों ये झोली भरे गा वो बदले गा खेल तकदीर का,

तू हो कर देख फ़कीर का.......

इस परम् भिभूति संत का तू मन के मंदिर में डेरा कर,

दिन फेरे गे साई बाबा तू उनकी माला फेरा कर,

तेरा बनके साया चलेगे वो तेरा भी भला करे गे वो,

बदले गा खेल तकदीर का,

तू हो कर देख फ़कीर का.........

यही गीता यही कुरान मेरा,

मेरा साई ही है भगवान मेरा,

यही जप तप है यही पूजन है यही यग है यही ध्यान मेरा,

इन के पीछे ही जीवन है,

सब कुछ इनको ही अर्पण है,

तू हो कर देख फ़कीर का

यही मालिक है आखिर का,

मैं हो गया साई फ़कीर का,

तू हो कर देख फ़कीर का

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।