मेरे मौला साई मेरे बाबा साई

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे मौला साई मेरे बाबा साई,

निगाहें करम तू मुझपे रेहम कर,

तेरे दर पे आया मेरी खाली झोली भर,

निगाहें करम साईं की,

मेरे मौला साई मेरे बाबा साई,

तुझसे ही तुझसे ही है बजूद,

धड़कने दिल में साई मौजूद,

मेरी सांसो में समाया दिल की धड़कन बन के आया,

हर बिगड़ी मेरी बनाता मेरा मुरशद तू है साई,

मेरे मौला साई मेरे बाबा साई.....

क्या हसीं खाव्ब या जेहन में,

इक मेरी भी ख़ास पहचान हो,

इल्तज़ार ही तो थी ये खवाइश पूरी करदी मेरे साई महान हो,

हर घडी हर पल तू ही तू हर कदम हमसफ़र मेरा साई,

मेरे मौला साई मेरे बाबा साई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।