मेरी आँख भर आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बिछड़े कभी ना हम,

मेरे श्याम तुमसे जीना सकू गा मैं सुन लो कसम से,

जब भी मैं भटका तू बना सहाई,

मेरी आँख भर आई,

बीते पलों की याद जो आई मेरी अंख भर आई,

तूने दया जो मेरे श्याम बरसाई,

मेरी आँख भर आई,

कैसे मैं भूलू कोई साथ नहीं था,

थामे जो ऐसा मुझे हाथ नहीं था,

आखिर में तूने पकड़ी कलाही,

मेरी आँख भर आई,

अनजान राहो में भटक रहा था ,

आन्ध्रों में दिल ये मेरा धड़क रहा था,

आखिर में तूने मुझे,

राह दिखाई मेरी आँख भर आई,

समज लिया क्यों आंसू मेरे बहते है,

हारे का साथी तुझे क्यों कहते है,

हारे हुयो को तूने जीत दिलाई,

मेरी आँख भर आई,

इस बेसहारे का सहारा बना तू श्याम कहे भगतो का किनारा बना तू,

दुभि हुई नैया को पार लगाई,

मेरी आँख भर आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।