मुझको रुलाने वाले मेरे मन

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॥ पावन पाठ ॥

मुझको रुलाने वाले मेरे मन,

ठोकर खिलने वाले मेरे मन,

दर दर डुलाने वाले मेरे मन,

प्रभु को भुलाने वाले मेरे मन,

दूर ना जईओ कहीं दूर।

मन मतवारे, भजन में लग जा रे,

बिगड़ी बनेगी तेरी प्रभु के द्वारे।

रहिओ भजन में मन तू,

दूर ना जईओ कहीं दूर,

चरनन से जईओ ना दूर॥

हीरे जैसी साँसे तेरी, सोने जैसी काया,

मुश्किल से तूने यह नर तन पाया।

करिओ मति रे गरूर,

दूर ना जईओ कहीं दूर,

चरनन से जईओ ना दूर,

छोड़ ना जईओ कहीं दूर॥

वादा क्या कर के आया, निभाएगा निभाले,

जन्मो के पापों को प्रभु नाम से मिटा ले।

रहिओ भजन में मन चूर,

दूर ना जईओ कहीं दूर,

चरनन से जईओ ना दूर,

छोड़ ना जईओ कहीं दूर,

जाएगा कहाँ यहाँ कोई भी ना तेरा,

झूठे जगत को क्यूँ कहता तू मेरा मेरा।

पागल जग तो दो दिन का है नूर,

दूर ना जईओ कहीं दूर,

चरनन तै जईओ ना दूर॥

छोड़ ना जईओ कहीं दूर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।