गुफा से बाहर आजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हो गुफा से बाहर आजा, तेरे नवरात्रे आए ll

तेरे नवरात्रे आए मईया, तेरे नवरात्रे आए

सब को दरस दिखा जा, तेरे नवरात्रे आए

हो गुफा से बाहर आजा,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे भक्तों ने तेरा, भवन सजाया, भवन सजाया

ज्योत जगा के तुझे, चौकी पे बिठाया, चौकी पे बिठाया

ज्योति में झलक दिखा जा, तेरे नवरात्रे आए

हो गुफा से बाहर आजा,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे भक्तों ने तेरा, चोला बनाया, चोला बनाया

गोटे किनारी से, उस को सजाया, उस को सजाया

चोले में दरस दिखा जा, तेरे नवरात्रे आए

हो गुफा से बाहर आजा,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे भक्तों ने मईया, भेंट चढ़ाई, भेंट चढ़ाई

करो स्वीकार इसे, हे महाँ-माई, हे महाँ-माई

तूँ आ के भोग लगा जा, तेरे नवरात्रे आए

हो गुफा से बाहर आजा,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे भक्तो ने तेरी, की है अरदास माँ, की है अरदास माँ

पूरी करदो अब, भक्तों की आस माँ, भक्तों की आस माँ

नैनो की प्यास बुझा जा, तेरे नवरात्रे आए

हो गुफा से बाहर आजा,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोड करता- अनिल भोपाल बाघीओ वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।