तेरे दर को छोड़कर

हरी ॐ शरण
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर को छोड़कर,

अरे तेरे दर को छोड़कर, किस दर को जाऊँ मैं ॥

सुनता मेरी कौन है ॥ किसे सुनाऊँ मैं

तेरे दर को छोड़कर...

जब से याद भुलाई तेरी, लाखों कष्ट उठाएं है

ना जाने इस जीवन में, कितने पाप कमाए हैं ॥

हूँ शर्मिंदा आपसे ॥ क्या बतलाऊँ मैं

तेरे दर को छोड़कर...

मेरे पाप कर्म ही तुझसे, प्रीत न करने देते हैं

जब चाहूँ तब मिलू आपसे, रोक मुझे ये लेते हैं ॥

अब किस विधि ॥ प्यारे आपका दर्शन पाऊँ मैं

तेरे दर को छोड़कर...

जो बीती सो बीत गई अब, बाकी उमर सँभालूँगा

आपके चरणों में बैठकर, गीत प्रेम के गा लूँगा ॥

यह जीवन अपना राम जी ॥ सफल बनाऊँ मैं

तेरे दर को छोड़कर...

तूँ है नाथ वरों का दाता, तुझसे सब वर पाते हैं

ऋषि, मुनि और योगी सारे, तेरे ही गुण गाते हैं ॥

छींटा दे दो ज्ञान का ॥ होश में आ जाऊँ मैं

तेरे दर को छोड़कर...

अपलोड कर्ता- अनिल भोपाल बाघीओ वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।