माखन चोर, नन्द किशोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

माखन चोर, नन्द किशोर, मन मोहन, घनश्याम रे ll,

कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे

देवकी माँ ने, जनम दिया, और मईया यशोदा ने पाला ll

तू गोकुल का, ग्वाला वृंदा, वन का बांसुरी वाला

हो आज तेरी बंसी, फिर बजी, मेरे मन के धाम रे,

कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे

माखन चोर, नन्द किशोर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

काली नाग के, साथ लड़ा तूँ, ज़ालिम कँस को मारा ll

बाल अवस्था, में ही तूने, खेला खेल ये सारा

हो तेरा बचपन, तेरा जीवन, जैसे एक संग्राम रे

कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे

माखन चोर, नन्द किशोर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तूने सब का, चैन चुराया, ओ चितचोर कन्हैया ll

वो जाने कब घर, आए देखे, राह यशोदा मैया

अरे व्याकुल राधा ढूंढे श्याम, न आया हो गई शाम रे

कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे

माखन चोर, नन्द किशोर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोड करता- अनिल भोपाल बाघीओ वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।