मेरी नैया भी पार हो जाये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी किरपा जो श्याम हो जाये,

मेरी नैया भी पार हो जाये,

रखले तू अपनी शरण सँवारे,

मन में उमंगें यही चाव रे,

यही बना अब मेरा भाव रे,

आस मेरी पूरी करे गा विश्वाश है,

रिश्ता मेरा तुमसे जुड़ा खासम ख़ास है,

मेरी नैया भी पार हो जाये.......

हालत पे मेरी रेहम तो करो,

जीवन के दुखडो को अब तो हरो,

खुशियों में जियु ये दामन भरो,

करने वाला सब कुछ तू ही तो दातार लीला दारी माया तेरी अप्रम पार है,

मेरी नैया भी पार हो जाये.....

मेरे प्यारे मोहन तू जो एक बार मिले,

चैन आ जाये मुझे जो तेरा दीदार मिले,

आंखे ने देखली जब तेरी सूरत मोहन आपके श्री चरणों में श्याम सफल हुआ ये जीवन,

भरोसा है तेरा भरोसा रहे चरणों में अमृत का दरिया भरे,

दास महिंदर ये दीपक कहे,

उज्याला भरने वाला बस तू ही एक है,

देर कभी होती नहीं रखता तू टेक है,

मेरी नैया भी पार हो जाये.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।