हरी गुण गान वालिया दी वेडी कड़े ना रूडी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरी गुण गान वालिया दी वेडी कड़े ना रूडी,

श्याम गुण गान वालिया दी वेडी कड़े ना रूडी,

जदों राणा ने मीरा नू जहर भेजिया

उने सम्जिया की अमृत वाला प्याला भेजिया

ओह ताँ पी गयी पी गयी उने लायी ना देरी

हरी गुण गान वालिया दी वेडी कड़े ना रूडी,

जदों राणा ने मीरा नू नाग भेजिया

उने सम्जिया की फूलाँ वाला हार भेजिया

उने पा लई लई गल फूलाँ दी लड़ी

हरी गुण गान वालिया दी वेडी कड़े ना रूडी,

जदों राणा ने मीरा नु घरो कडिया

मीरा तुर तुर गयी मधुवन दी गली

हरी गुण गान वालिया दी वेडी कड़े ना रूडी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।