सोच समझ के चाल

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॥ पावन पाठ ॥

सोच समझ कै चाल गलती मैं बणी सो बणी,

चोरी जारी और बदमाशी की कहीं नहीं टकसाल,

बिना पढ़ाया आपै पढ़गा ऐसे कर्म चण्डाल,

बदी की पट्टी थी जितणी,

कान पकड़ कै आगै कर ले एक दिन तुझको काल,

मात पिता बंधू सुत धारा जब कोण अड़ा लेगा ढ़ाल,

अकेली जागी ज्यान अपणी,

धर्मराज तेरे कर्मां की एक दिन करै सम्भाल,

चिमटे लाल करा कै खिंचवा देगा खाल,

जिगर मैं चालैं सैलां की ऐणी,

बालकपण मैं भूल गया दुनिया दारी के खयाल,

काट्या जा तै काट मेहर सिंह मोह ममता का जाल,

गीता तै गाली बहुत घणी।

Sandeep स्वामी

Alwar(Raj)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।