रटके करतार की माला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जीणा दिन चार हो ज्यागा पार,

रट के करतार की माला,

लाग्या था कुबद कमावण

बण मैं गया जानकी नै ठावण

उस रावण के शेर, चालै फैर, मत कर बैर, कापाला।

मुर्ख बात घड़ै क्यू ठाली

तेरी तै एक पेश ना चाली

उस बाली की ढाल, खाज्या काल, मतकरै आल, हो चाला

किचक था खोहा खेड़ी

घाल ली काल बली नै बेड़ी

छेड़ी द्रोपद नार, वो दिया मार, जो सरदार का साला।

मेहर सिंह भजन कर सूत

वे हों सैं देशां के ऊत

यम के दूत करोड़, दें सिर फोड़, ले ज्यांगे तोड़ कै ताला।

Sandeep स्वामी

Alwar(Raj.)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।