माँ तू आंबे मेरी माँ जगदबे मेरी

पारंपरिक
महादेव आरती दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माँ तू आंबे मेरी माँ जगदबे मेरी,

आरती उतारे आज हम सब तेरी,

पान सुपारी ध्वजा नारियल तेरी भेट चढ़ाये,

लाल चवर तेरे अंग विराजे केसर तिलक लगाए,

माँ तू आंबे मेरी माँ जगदबे मेरी....

ब्रह्मा वेद पड़े तेरे द्वारे शंकर ध्यान लगावे,

बर्मा रुद्राणी तेरी महिमा हम सब गावे,

माँ तू आंबे मेरी माँ जगदबे मेरी

उज्वल से दो नैनन में तेरे मैया तीनो लोक समाये,

सतयुग रूप सील अति सूंदर नाम सती कहलाये,

माँ तू आंबे मेरी माँ जगदबे मेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।