तपस्या करे गोरी मसाने में खेले होली

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तपस्या करे गोरी मसाने में खेले होली,

भोले को मनाये भभूती लगाये,

भुत प्रीतो की लेके टोली,

तपस्या करे गोरी मसाने में खेले होली,

भभूती लगाये तन भस्म रमाये,

गले में मुंड माला डमरू भ्जाये,

भोले को रिजाये अलख जगाये,

आ गोरियों के लेके टोली,

तपस्या करे गोरी मसाने में खेले होली,

मरघट में पूजे मशाने में पूजे,

काशी में मैया गोरी कासी नाथ को पूजे,

फूल चड़ाए धतुरा चड़ाए,

भांग की चडाए गोली ,

तपस्या करे गोरी मसाने में खेले होली,

संयोगिनी मनाये छप्पन तलवे मनाये,

श्मशान का वासी शंकर ही कहलाये,

कृष्ण भोला तूने गाये श्री ॐ संख बजाए,

सब भक्तो ने जय बोली,

तपस्या करे गोरी मसाने में खेले होली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।