मैं करूं शुक्रिया

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॥ पावन पाठ ॥

जब जरूरत थी मुझको साईं ने दिया बाबा ने दिया,

मैं करूं शुक्रिया मैं करूं शुक्रिया ।

सारी दुनिया में इनको तो रोशन किया हां रोशन किया,

मैं करूं शुक्रिया मैं करूं शुक्रिया...जब जरूरत ॥

दुनिया है दीवानी साईं नाथ की हाथ साईं नाथ की,

उनको देखा तो मैं भी दीवाना हुआ हां दीवाना हुआ ।

शिरडी मंदिर में साईं का दर्शन हुआ हां दर्शन हुआ,

मैं करूं शुक्रिया मैं करूं शुक्रिया...जब जरूरत ॥

लड़खड़ाने से पहले संभाला मुझे हां संभाला मुझे,

गम के हर एक भंवर से निकाला मुझे हां निकाला मुझे ।

ना दिया मेरी आशा का बुझने दिया हां बुझने दिया,

मैं करूं शुक्रिया मैं करूं शुक्रिया...जब जरूरत ॥

साईं तुमसा कोई भी फरिश्ता नहीं हां फरिश्ता नहीं,

यू निभाता कोई मुझसे रिश्ता नहीं हां रिश्ता नहीं ।

मुस्कुराकर मेरे अश्कों को पी लिया,

मैं करूं शुक्रिया मैं करूं शुक्रिया...जब जरूरत ॥

जग के झूठे झमेलों से मुंह मोड़ लो हां मुंह मोड़ लो,

प्रीत मेरी तरह साईं से जोड़ लो साईं से जोड़ लो ।

तुम भी वही कहोगे ''सचिन'' ने कहा,

मैं करूं शुक्रिया मैं करूं शुक्रिया...जब जरूरत ॥

संकलन:गिरधर महाराज

भाटापारा छत्तीसगढ़

93000 43737

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।