मत कर मेरा मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

चेत सके तो चेत बावला , कर ले भजन में हेरा है,

इस दुनिया में नहीं कोई तेरा , मत कर मेरा मेरा है,

भूल भरम में फस गयो भान्दू , तूं कहता घर मेरा है,

नही घर तेरा नही घर मेरा , जाय जंगल मे डेरा है,

चेत सके तो चेत .......

जैसे शिर पर सुन्दर माया , पकड़ लिया जुग सारा है,

खावे तो मर जावे बावरा , छोड्या होय अंधेरा है,

चेत सके तो चेत.......

ऊंचा चढ़कर हेला देवो , सुणो गुरुजी का प्यारा है,

जो तरबा कि मोक्ष छावो , चलो गुरां के द्वारा है,

चेत सके तो चेत.....

गगन मण्डल ज्योति जले , तन मन जोत अपारा है,

जेठुपुरी भरम की बातां , देश देश घर न्यारा है ,

चेत सके तो चेत.....

( प्रजापति म्यूजिकल ग्रुप 89479-15979 )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।