ओहदा डम डम डमरू बोल्दा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओहदा डम डम डमरू बोल्दा जदो शिव पी लेंदा भंग,

फेर धरती अम्बर ढोल दा सब देख रह जांदे दंग,

ओहदा डम डम डमरू बोल्दा .........

पी के प्याला शम्भू रंग की विखावे,

मस्ती दे विच तीनो लोक नचावे ,

कैसी मस्ती चढ़ गई शिव न कैसा चड़ियाँ रंग,

ओहदा डम डम डमरू बोल्दा

खोल के जटावा शिव लेंदा है हुलारे,

वख दुनिया तो आज होये ने नजारे,

वखारा नाच है शिव शंकर दा वखारा सब तो ढंग,

ओहदा डम डम डमरू बोल्दा ....

शिव भोले नाथ जदो डमरू भजावां देवी देवते भी फूल वर सावन,

सूरज महिमा शिव दी लिखदे लकी महिमा शिव दे गोंडा होक मस्त मलंग

ओहदा डम डम डमरू बोल्दा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।