वे आजा कान्हा खेडीये लुकन मचाइयाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आज मेरियाँ सखियाँ आइया सबने ने आसा लगाइयाँ,

वे कर के पूगण पुगाइयाँ वे आजा कान्हा खेडीये लुकन मचाइयाँ,

सूरज भी देख ले छिपन वाला हो गया,

मौसम भी देख ले सुहाना जेहा हो गया,

आइया कर सब तयारी लगे इक तो इक प्यारी,

अइया कर के सब तयारी लगे इक तो इक प्यारी,

तेरी दीद दिन रहईया,

वे आजा कान्हा खेडीये लुकन मचाइयाँ,

तेरे मुहरे लुकना वि किसे दी मझाल की,

तू कीह्नु लबना है तेरा ही कमाल जी,

फे तू ऐसी कला दिखानी हर कोई खींची चली ऍह ओनी,

होये एसिया कुंडियां पाइया,

वे आजा कान्हा खेडीये लुकन मचाइयाँ,

मुरली बजा के कोई छेड़ा ऐसा राग वे,

सुरमे सा बन हो जाये सारी कायनात वे,

दिल भाग वि होये दीवाना तेरा जीवे भगत सुदामा,

हूँ सब ते मस्तिया छाइयाँ,

वे आजा कान्हा खेडीये लुकन मचाइयाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।