आज बेटी जनक की

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

आज बेटी जनक की अवध को चली

मां की ममता चली घर की लक्ष्मी चली ॥

आई बेटी....

कौन कहता है ज्ञानी जनक हैं बड़े,

प्यारी बेटी के आँसू लिये हैं खड़े,

मां सुनैना के आँखों की पुतली चली,

आज बेटी जनक...... ...

तोता मैना पुकारे सिया ओ सिया,

बन्द पिंजरे में क्यूँ तूने मुझको किया,

आज उड़ जा तहन भी अवध की गली,

आज बेटी जनक............

तोता रोओ नहीं न रोओ सरका,

आँसुओ से भरा है जीवन नारी का,

कह देना पिता की दुलारी चली

आज बेटी जनक..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।