मैनु तेरियां उडीका सदा रेहन दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं विशाये तेरे रहावा विच नैन दातिए,

मैनु तेरियां उडीका सदा रेहन दातिए,

तू ना आई किनियाँ दुआवा मैं माँगियां,

दूर कातो कीतियां ना मेरिया तू तंगियां,

हंजू अखियां को छम छम बहिन दातिए,

मैनु तेरियां उडीका सदा रेहन दातिए,

ज़िंदगी मैं सारी तेरी याद च गुजारी माँ,

मेरी तकदीर दस कातो ना सवारी माँ,

दुःख मेरे कोलो हुन्दे नहियो सेहन दातिए,

मैनु तेरियां उडीका सदा रेहन दातिए,

हर साल दर आके हज़ारियाँ लाइयाँ माँ,

तेरे नवरातियाँ च जोता भी जागियां माँ,

किता भजन तेरा मैं दिन रेहन दातिए,

मैनु तेरियां उडीका सदा रेहन दातिए,

तारा अपरे दा मांगे रेहमता माँ तेरियां,

करदे तू मेहरा भुला बकशदे तू मेरिया,

तनु मेहरा वाली दाती सारे केहन दातिए,

मैनु तेरियां उडीका सदा रेहन दातिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।