हे डमरूधर शिव नटराजन, हम भी तुमको दिल दे बैठे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे डमरूधर शिव नटराजन, हम भी तुमको दिल दे बैठे,

हे डमरूधर शिव नटराजन,

हम भी तुमको दिल दे बैठे,

इक दिल ही तो बस प्रभु था अपना,

यह दिल भी तुम्हारा कर बैठे,

हे डमरूधर शिव नटराजन-----

दिल कहता है तुम दानी हो,

पर मन कहता कैसे मानूँ,

कभी आओ हमें दरसन देने,

फिर हम भी कहें मेरे हो बैठे,

हे डमरूधर शिव नटराजन-------

शिव सत्य तुम्ही भगवंत तुम्ही,

ब्रह्म अनादि अनंत तुम्ही,

मन भूल से भी न गुणगान करे,

तुम हो कि मुझे अपना बैठे,

हे डमरूधर शिव नटराजन-------

हे रामचरन अनुरागी शिव,

हे अबिनासी बैरागी शिव,

अब ऊर धरी नित तुमको ध्याऊँ,

अज्ञान हमारा सब हर बैठे,

हे डमरूधर शिव नटराजन,

हम भी तुमको दिल दे बैठे,

इक दिल ही तो बस प्रभु था अपना,

यह दिल भी तुम्हारा कर बैठे----।।

आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।