हरी हर एक हैं दोनो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरी हर एक हैं दोनो ना ये कम है ना वो कम है,

ये रहते है हिमालये में वो रहते शीर सागर में,

ससुर घर दोनों रहते है,

ना ये कम है न वो कम है....

ये पीते भांग का प्याला,

वो पीते प्रेम रस प्याला,

नशे में दोनों रहते है,

ना ये कम है न वो कम है....

उमा की बात ये माने,

रमा की बात वो माने,

पिया का मान करने में,

ना ये कम है न वो कम है....

उन्हों ने त्रिम्भ को दांता,

इन हो ने यश सिर काटा,

ससुर अब मान करने में,

ना ये कम है न वो कम है....

उन्हों ने धार को काटा,

इन्हों ने वित्विपर काटा,

जगत उपकार करने में,

ना ये कम है न वो कम है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।