जय गणपति वंदन गणनायक

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जय गणपति वंदन गणनायक ॥

तेरी छवि अति सुंदर सुखदायक ॥

जय गणपति.......

है चार भुजाधारी मस्तक, सिंदूरी रूप निराला,

है मूसक वाहन तेरो, तू ही जग का रखवाला,

तेरी सुंदर मूरत मन में-२ तू पालक सिद्धि विनायक,

जय गणपति.....

मन मंदिर का अँधियारा, तेरे नाम से हूँ उजियारा,

तेरे नाम की ज्योति जली तो, मन में बहती सुख धारा,

तेरी सिमरन हर को जनमें, सबसे पहले फलदायक,

जय गणपति....

तेरे नाम को जिसने ध्याया, उस पर रहती सुखछाया,

मेरे रोम रोम अन्दर में, इक तेरा रूप समाया,

तेरी महिमा तू ही जाने-२ शिव पार्वती के बालक,

जय गणपति.....

सिंगर भरत कुमार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।