नि रंगा तो मैं फिर बच्दी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नि रंगा तो मैं फिर बच्दी श्याम होलियां खेडन नु आ गया,

नि आंद्रा च फिरा लुक दी पिचकारी ओ ते रंगा दी वगा गया,

नि रंगा तो मैं फिर बच्दी.......

गलियां च धूम मच गई श्याम सड़ी गली विच आया,

थोड़ा थोड़ा रंग उस ने आज सरिया दे ऊठे छिडकाया,

नि वेख के निहाल हो गया ऐसा रूप अनोखा विखा गया नि,

नि रंगा तो मैं फिर बच्दी....

चार चुबरे ऑडियो आज खुशियां दा आलम छाया,

सतरंगी रंग उड़ दे जह्नु देख के दिल परवाया,

नि लाल ते गुलाबी नीला पीला हारा रंग मेरे ते बाह गया,

नि रंगा तो मैं फिर बच्दी......

खुशियां च फिरा भजदी आज पैर नि ज़मीन ते लगदे,

वेख वेख भूख भजदी श्याम अथरे रंगा विच सज दे,

नि सरियाँ ते आज ऑडियो महरा दा मीह बरसा गया,

नि रंगा तो मैं फिर बच्दी.......

श्याम दे रंगा ने आज सब नु सदाई किता,

नाम दा प्याला ओस दा आज ब्रिज शर्मा भी पिता,

नि आरती भी धन हो गई जह्नु सपने च दर्श दिखा गया,

नि रंगा तो मैं फिर बच्दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।