जग नु हसान वालिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जग नु हसान वालिया मैनु हसया बड़ा चिर होया,

तेरे नाल यारी ला के मेरा दिल जी भर के रोया,

जग सारा हसदा ते लोकि ताने मारदे,

जख्मी दिल नु होर लोकि साड दे,

दर्द एह सुनावा किसनू मेरा सारा जग वैरी होया,

जग नु हसान वालिया........

जग रुसदा है श्यामा तू न रूस जावी वे,

दुनिया ने ठुकराया तू भी न ठुकराई वे,

लेखा दे लिखन वालियां केडी गल तो नसीब मेरा सोया,

जग नु हसान वालिया...

किसे नु हसावदा किसे नु रुलामदा,

प्रेमिया दे दुबे बेड़े आप बने लगान दा,

मेरी वारि किथे लुकियाँ तनु लब लब पागल होया,

जग नु हसान वालिया..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।